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रामनवमी से कुछ दिन पहले ही मिले इस तरह के पत्थर से अब इलाके में अफवाहों का दौर भी शुरू हो गया है। कोई इस पत्थर को राम सेतु का हिस्सा बता रहा है तो कोई इसे चमत्कार कह रहा है। फिलहाल इस पत्थर को नहर किनारे स्थित शिव मंदिर में रखा गया है जहाँ इसके दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड रही है।
सीतामढ़ी व कुदुरमाल में भी है रामशिला
यह पहली बार नहीं जब हसदेव नदी में राम शिला पाया गया हो। सीतामढ़ी गुफा मंदिर के अलावा कुदुरमाल हनुमान मंदिर में भी रामशिला रखा हुआ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शिला की अवधारणा किसी न किसी दृष्टि में हसदेव नदी से जुड़ी हुई है, जहां से इस तरह के विशिष्ट चट्टान के पत्थर पाए गए हैं।
एक्सपर्ट व्यू
पृथ्वी पर कई तरह के तलहटी चट्टानें पाई जाती है। हजारों वर्षों के अंतराल में बनने वाले तलहटी चट्टानी पत्थरों पर ताप व दाब के साथ विभिन्न् तत्वों के मिश्रण का प्रभाव होता है। कई बार चट्टानी पत्थर के निर्माण में लकड़ी, मिट्टी व रेती का संयोजन होता है। जिस तत्व का घनत्व अधिक होता है, उसका उस चट्टानी पत्थर पर प्रभाव पड़ता है। इस तरह के पत्थरों में लकड़ी के तत्वों का अधिक घनत्व होता है। इस वजह से पत्थर पानी में डूबने की बजाय तैरने लगते हैं।
– डॉ. आरके सक्सेना, प्राध्यापक, भौतिक शास्त्र, दीपका महाविद्यालय














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