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1. भविष्य
पुराण में बताया गया है कि नागों के प्रजनन का समय ज्येष्ठ और आषाढ़ मास होता है। इन दिनों नाग मैथुन करते हैं। यानी यह महीना सांपों के गर्भ धारण का समय है।
2. वर्षा
ऋतु के चार महीने तक सार्पिनी गर्भ धारण करती है और कार्तिक के महीने में सर्पिनी प्रसव करती है यानी अंडे देती है।
3. गर्भवती
नागिन एक बार में दो सौ चालीस अंडे देती है।
4. नाग
अपने अंडों को स्वयं खा जाता है। ईश्वरीय कृपा से जो अंडे बच जाते हैं उनसे नागों का वंश आगे बढ़ता है।
5. सोने
के समान आभा वाले अंडे से नाग का जन्म होता है।
6. लंबी
रेखाओं से युक्त अंडों से नागिन उत्पन्न होती है।
7. पुराण
के अनुसार नागों में भी नपुंसक पैदा होते हैं। इनके बारे में बताया गया है कि ललिमा युक्त अंडे से जन्म लेने वाले नाग नपुंसक होते हैं।
8. अंडे
से बाहर आने के केवल सात दिन बाद संपोलों का रंग काला हो जाता है।
9. अंडे
से बाहर आने के 21 दिन बाद नाग के विषदंत आ जाते हैं और 25 दिन बाद नागों में किसी के प्राण छीनने की क्षमता आ जाती
है।
10. नाग
दीर्घायु होते हैं। अगर यह अकाल मृत्यु से बच जाए तो यह 120 वर्ष तक जीवित रह सकते है।
11. जो
सांप समय से पहले जन्म ले लेते हैं उनका विष मंद होता है और उनकी आयु भी कम होती है।
12. मनुष्य
की तरह सांप के भी बत्तीस दांत होते हैं। इनके चार विषैले दाढ़ होते हैं जिनके नाम हैं मकरी, कराली, कालरात्री और यमदूती।
13. सांप
जब किसी को काटकर पूरा विष उगल देता है तब पेट के बल उलट जाता है। इस प्रकार से सांप जिसे काट लेता है उसका जीवित बचना बड़ा कठिन होता है।
14. सांप
के दो सौ चालीस सूक्ष्म पैर होते हैं इसलिए दिखाई नहीं देते। चलते समय यह पैर बाहर निकल आते हैं अन्य समय शरीर में प्रविष्ट कर जाते हैं।
15. भविष्य
पुराण के अनुसार सर्प के काटने से जिनकी मृत्यु होती है वह वह अधोगति को प्राप्त करते हैं और अगले जनम में बिना विष वाले सांप होते हैं।
16. सांप के दांत जन्म से 7 दिनों
के बाद निकल आते हैं और 21 दिनों बाद सांप जहरीला हो जाता है
यानी किसी को अपने विष से मृत्यु के मुंह में पहुंचा सकता है।
17. जैसे ही सांप किसी को डसता है तुरंत
अपने जबड़े से तिक्ष्ण विष छोड़ता है और फिर विष इकट्ठा हो जाता है।
18. जिन सांपों के दांत लाल, पीले या
सफेद होते हैं वह कम विषैले होते हैं। ऐसे सांप की आयु भी कम होती है।
19. सांपों के 32 दांत और
चार विष दंत होते हैं। इन विष दंतों के नाम हैं मकरी, कराली, कालरात्रि
और यमदूती। इन चारों दांतों के काटने का अलग-अलग प्रभाव होता है।
20. यमदूती नाम की दांत सबसे छोटी होती है।
इस दांत से सांप जिसे काटता है वह तुरंत मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
21. सांप का विष दाहिने आंख के समीप
होता है। क्रोध करने पर विष पहले मस्तिष्क में पहुंचता है फिर धमनी में और इसके
बाद नाड़ियों से होता हुआ विष दंत में पहुंचता है। सांप के हर दांत पर एक खास चिन्ह
पाया जाता है जो हर दांत पर क्रमशः चार महीने में उभरता है।
22. भविष्य पुराण में बताया गया है कि
सांप आठ कारणों से किसी को डसता है। दबने से, भय से, मद से, पहले के
वैर से, भूख से, विष का वेग होने से, संतान की
रक्षा के लिए और काल की प्रेरणा से।
23. जब सांप काटने पर चार दांत के निशान
नजर आए तो समझना चाहिए कि सांप ने काल की प्रेरणा से काटा है। इसमें मृत्यु की
संभावना सबसे अधिक रहती है।












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